करामत_ए_गौ़स_ए_आ़जम

शैख़ अबुल मसऊद बिन अबी बक्र हरीमी बग़दादी रहमतुल्लाह अलैह ने बयान किया है
कि अबुल मुज़फ्फर हसन बिन तमीम ताजिर शैख़ हम्माद दब्बास रहमतुल्लाह अलैह की ख़िदमत में हाज़िर हुवा और अर्ज़ किया
या सय्यदी! मैं तिजारत की ग़र्ज़ से सफर करना चाहता हूँ। शैख़ हम्माद रहमतुल्लाह अलैह ने फरमाया......

अगर तुम ने इस साल  सफर किया तो कत्ल कर दिये जाओग, और तुम्हारा माल व असबाब लूट लिया जाएगा। अबुल मुज़फ़्फ़र ताजिर बड़ा हैरान व परेशान, होकर मजलिस से बाहर आ गया और हुजूर गौसे आज़म रज़ियल्लाहु  तआला अनहु की बारगाहे करम में हाज़िर होकर सफ़र में जाने की, इजाज़त चाही.....

सरकार गौसे आज़म रज़ियल्लाहु तआला अनहु ने  फरमाया ऐ अबुल मुज़फ्फर तुम सफ़र करो सहीह सलामत लौट आओगे और मैं इस बात की ज़मानत देता हूँ। अबुल मुज़फ्फर ताजिर सफ़रे तिजारत पर निकला और अपना सामान एक हज़ार दीनार में फरोख्त कर दिया और वह एक हम्माम में नहाने की गर्ज़ से गया....

और ताक में एक हज़ार दीनार की थैली रख दी और उसे उठाना, भूल गया और उस मकान में आ गया जहाँ उस का कयाम था और गहरी नींद में सो गया।
आलमे ख्वाब में क्या देखता है कि वह एक काफिले के हमराह सफर कर रहा है और रास्ते में अरब के डाकुओं
ने उस काफिले पर हमला कर दिया
और काफ़िले के हर शख्स को! मौत की नींद सुला दिया और एक डाकू ने उस की गर्दन पर तलवार मारी जिससे गर्दन कट कर अलग हो गई। वह इस परेशान कुन ! ख्वाब से बेदार हुवा और काँपने लगा और उसे अपनी गर्दन पर खुन का असर महसूस हो रहा था
और काफी जर्ब का दर्द महसस हो रहा था,
उसे अपना रूपया याद आया और हम्माम में दौड़ कर गया, उस का हज़ार दीनार ताक़ में रखा हुवा था।
बगदाद शरीफ सफर से वापसी पर उस ने फैसला किया कि दोनों। बुजुर्गों से मुलाकात करूँगा और हज़रत हम्माद दब्बास रहमतुल्लाह अलैह जो ज़ईफ़ थे उन की ख़िदमत में हाज़िर हुवा......

हज़रत हम्माद दब्बास रहमतुल्लाह अलैह ने देखते ही फ़रमयाः शैख़ सय्यद अब्दुल कादिर जीलानी रज़ियल्लाहु तआला अनहु के पास जाओ क्यों कि वह  अल्लाह तआला के महबूब हैं और उन्होंने तुमको क़त्ल होने और तुम्हारे माल के नुकसान होने से बचाने के लिये अल्लाह तआला की बारगाह में सत्तर बार दुआ की है....

जबकि तुम्हारी तकदीर में कत्ल और माल का नुकसान लिखा था लेकिन अल्लाह तआला ने शैख अब्दुल कादिर रज़ियल्लाहु तआला अनहु की दुआ की बरकत से! तुम्हारी तक़दीर को बदल दिया और सिर्फ ख्वाब में उस का मंज़र दिखा कर कत्ल और माल के नुकसान से बचा लिया.....

फिर अबुल, मुज़फ्फ़र ताजिर सरचश्मए विलायत सरकारे गौसियत हुजूर गौसे आज़म रज़ियल्लाहु तआला अनहु की रहमत वाली सरकार में हाज़िर हुवा आप ने फ़रमाया तुमको शैख़ हम्माद रहमतुल्लाह अलैह ने मेरी सत्तर दुआ का वाक़िअह सुना दिया है
हमारे आका गौसे आज़म ने  फ़रमाया खुदा की कसम मैं ने तुम को क़त्ल से और तुम्हारे माल को, नुकसान से बचाने के लिये अपने अल्लाह तअला की बारगाहे फज्लो करम में सत्तर बार दुआ की जिसकी वजह से अल्लाह तआला ने तुम्हारी तकदीर को बदल दिया......

और बेदारी की चीज़ को ख्वाब में दिखा दिया।

(बहजतुल असरार, शैख़ अब्दुल हक़ देहलवी, जुबदतुल आसार, सफ़ह ८५)

या दस्तगीरा करम


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