Replayed to Shant Rampal by Saddam Raza Siddique

 दोस्तों कई दिनों से देखा जा रहा है कि संत रामपाल के मानने वाले क़ुरान की एक सूरह से ये साबित करना चाह रहे  हैं, कि क़ुरान की सूरह फुरकान की आयत नंबर 52 - 59 की बीच जो लफ्ज़ 'कबीर' आया है, वो दरअसल कबीर दास के लिए आया है और वहीं अल्लाह है.....


 माज़'अल्लाह, सुम्मा माज़'अल्लाह......आप दिए गए पिक्चर में देख सकते है......


अब आईये हम देखते है कि संत रामपाल की मानने वाले जो बातें कह रहे हैं वो अपने दावे में कितने सच्चे है..... दरअसल ये भंडवा एक टाइप के जाहिल इंसान हैं....


और कुछ मुस्लिम में अन्धभक्त हैं, जिनके अंदर सेक्युलरिज्म का किड़ा पनपता है वो पढ़ते तो हैं नहीं,  सिर्फ देख लिए फलां शख्स ने ये चीज लिखा है उसे वायरल करते हैं......

और इनका यही काम है झूठ फैलाना.....


अब आईये इन्होने जो आयत से कबीर दास को साबित करना चाह रहे हैं हम आयत नंबर 52 - 59 तक देखते है.....


सुराह फुरकान सूरह नंबर 25 आयत नंबर 52 


فَلَا  تُطِعِ الۡکٰفِرِیۡنَ وَ جَاہِدۡہُمۡ بِہٖ جِہَادًا کَبِیۡرًا ﴿۵۲﴾


तर्जुमा / Translate :- पस आप काफिरो का कहना न माने और क़ुरान के जरिये उन से पूरी ताकत से बड़ा जिहाद करें.....


सुरह फुरकान आयत नंबर 53 


وَ ہُوَ الَّذِیۡ مَرَجَ الۡبَحۡرَیۡنِ ہٰذَا عَذۡبٌ فُرَاتٌ وَّ ہٰذَا مِلۡحٌ  اُجَاجٌ ۚ وَ جَعَلَ بَیۡنَہُمَا بَرۡزَخًا  وَّ  حِجۡرًا  مَّحۡجُوۡرًا ﴿۵۳﴾


 तर्जुमा / Translate :-  और वही  है जो दो समुन्दर आपस में मिला रखे हैं , ये है मीठा और मजेदार और ये है खारी कड़वा और इन दोनों के दरमियान एक हिजाब ( Barrier ) और मजूबत ओट कर दी....


सुरह फुरकान आयत नंबर 54 ....


وَ ہُوَ الَّذِیۡ خَلَقَ مِنَ الۡمَآءِ بَشَرًا فَجَعَلَہٗ  نَسَبًا وَّ صِہۡرًا ؕ وَ کَانَ رَبُّکَ قَدِیۡرًا ﴿۵۴﴾


तर्जुमा / translate :- वो ( अल्लाह ) है जिसने  पानी से इंसान को  पैदा किया है , फिर उसे नस्ब वाला और सुरीली रिश्तों वाला कर दिया , बिला शुबा आप का परवरदिगार हर चीज पर क़ादिर है....


सुराह फुरकान आयत नंबर 55 


وَ یَعۡبُدُوۡنَ مِنۡ دُوۡنِ اللّٰہِ مَا لَا یَنۡفَعُہُمۡ  وَ لَا یَضُرُّہُمۡ ؕ وَ کَانَ الۡکَافِرُ عَلٰی  رَبِّہٖ   ظَہِیۡرًا ﴿۵۵﴾


ये अल्लाह को छोड़ कर उनकी इबादत ( पूजा ) करते है , जो न उन्हें कोई नफा दे सके , न कोई नुक्शान पहुँचा सके , और काफ़िर तो है ही अपने रब के खिलाफ ( शैतान की ) मदद करने वाला.....


सुराह फुरकान आयत नंबर 56 


وَ مَاۤ  اَرۡسَلۡنٰکَ  اِلَّا مُبَشِّرًا وَّ نَذِیۡرًا ﴿۵۶﴾.....


तर्जुमा / Translate :- हमने तो आपको खुशखबरी और डर सुनाने वाला ( नबी ) बना कर भेजा......


सुराह फुरकान आयत नंबर 57 


قُلۡ مَاۤ  اَسۡئَلُکُمۡ  عَلَیۡہِ مِنۡ اَجۡرٍ  اِلَّا مَنۡ  شَآءَ  اَنۡ یَّتَّخِذَ  اِلٰی رَبِّہٖ سَبِیۡلًا ﴿۵۷﴾....


तर्जुमा / ट्रांसलेट :- कह दीजिये  कि मैं क़ुरान के पंहुचाने पर तुमसे कोई बदला नहीं चाहता , मगर जो शख्स अपने रब की तरफ रह पकड़ना चाहे......


सुराह फुरकान आयत नंबर 58 


وَ تَوَکَّلۡ عَلَی الۡحَیِّ الَّذِیۡ لَا یَمُوۡتُ وَ سَبِّحۡ بِحَمۡدِہٖ ؕ وَ کَفٰی بِہٖ بِذُنُوۡبِ عِبَادِہٖ خَبِیۡرَا ﴿۵۸﴾ۚ ۛ ۙ


तर्जुमा / ट्रांसलेट :- उस हमेशा जिंदा रहने वाले अल्लाह तआला पर भरोसा करे , जिसे कभी मौत नहीं , और उसकी तारीफ की साथ पाकीजगी बयान करते रहे , वो अपने बन्दों के गुनाहो से काफी खबरदार है.....


सुराह फुरकान आयत नंबर 59 


 ۣالَّذِیۡ خَلَقَ السَّمٰوٰتِ وَ الۡاَرۡضَ وَ  مَا بَیۡنَہُمَا فِیۡ سِتَّۃِ  اَیَّامٍ ثُمَّ  اسۡتَوٰی عَلَی الۡعَرۡشِ   ۚ ۛ  اَلرَّحۡمٰنُ فَسۡئَلۡ بِہٖ خَبِیۡرًا ﴿۵۹﴾


तर्जुमा / ट्रांसलेट :- वही ( अल्लाह ) है जिसने आसमानो  और ज़मीन की सब चीजो को पैदा कर दिया है ,  फिर अर्श पर मुस्तवी हुआ वो रहमान है , आप उसके बारे में किसी खबरदार से पूछ ले.....


दोस्तों ये थी सूरह फुरकान कि आयत नंबर 52 - 59 तक 


अब आईये हम देखते है कि इन आयत का मतलब क्या है 


आयत नंबर 52 में आया है.....


पस आप काफिरो का कहना न माने और क़ुरान के जरिये उन से पूरी ताकत से बड़ा जिहाद करें......


इसी आयत में अरबी में एक लफ्ज़ आया है ' कबीर ' जिसके बारे में रामपाल के मानने वाले कह रहे हैं मेये आयत में जो कबीर आया है वो संत कबीर के बारे में आया है.....


1) सबसे पहली चीज  लफ्ज़ ' कबीर ' एक अरबी लफ्ज़ है इसका  मतलब होगा ( बड़ा )....

लफ्ज़ कबीर को इंगलिश में कहेगें ( ग्रेट )....


और हिंदी या उर्दू में कहेगेंं  ( बड़ा )कबीर का मतलब अल्लाह होता ही नहीं हैं......


2) दूसरी चीज़. यहाँ पर जो कबीर आया है वो जिहाद ( धर्मयुद्ध )  के लिए आया है न की अल्लाह के लिए आप आयत का तर्जुमा पढ़िए ......


बस आप काफिरो का कहना न माने और क़ुरान के जरिये उन से पूरी ताकत से बड़ा जिहाद करें .....


"अल्लाह" तॉला इस आयत में कह रहा है ऐ नबीं आप पूरी ताकत से कबीर जिहाद यानि बड़ा जिहाद करें.....


अब इन लोगों ने क़ुरान तो पढ़ा है नहीं जो मन में आता है बोल देते है.....


3 ) तीसरी बात ये लोग जो दावा कर रहे हैं कि क़ुरान में जो कबीर आया है ये कबीर दास के लिए है और यही कबीर दास मुसलमानो के रब है.....माज'अल्लाह


इस आर्टिकल में आयत नंबर 52 - 59 तक का जिक्र है जब आप आयत नंबर 58 पढ़ेंगे तो उसमें लिखा है....


उस हमेशा जिंदा रहने वाले अल्लाह तआला पर भरोसा करे , जिसे कभी मौत नहीं , और उसकी तारीफ की साथ पाकीजगी बयान करते रहे , वो अपने बन्दों के गुनाहो से काफी खबरदार है.....


यानी हम मुसलमानो का जो अल्लाह है रब है वो हमेशा से जिंदा है उसे कभी मौत नहीं आएगी.......


लेकिन रामपाल के मानने  वालोंं कबीर दास  मर चुके हैं और कबीर दास का जन्म हुआ है और कबीर दास के माता पिता भी है आप कबीर दास की जीवन परिचय पढ़िए मौका मिले तो देखिये कबीर दास का जन्म 1389 को काशी यानि वाराणासी में हुआ था उनके बारे में एक बात बताई जाती है एक विधवा औरत  समाज के लोक और लज्जा के कारण उन्हें लहरतारा नामक तालाब पर छोड़ आयी थी जहाँ से नीरू और नीमा नामक जुलाहे ने उनकाे अपने घर लेकर आए और सन् 1518 में कबीर दास का देहांत ( मौत ) मघहर में हुआ था.....


ये आपने कबीर दास का जीवन परिचय देख लिया पढ़ लिया......


हम मुसलमान जिसे अपना अल्लाह मानते है वो हमेशा से जिंदा है उसे कभी मौत नहीं आएगी और अपने सूरह फुरकान की आयत नंबर 52-59 पिक्चर में छापा है तो आप सूरह फुरकान की आयत नंबर 58 पढ़िए वो जो अल्लाह है जिसे हम मुस्लमान अपना अल्लाह मानते है वो हमेशा से जिंदा है उसे कभी मौत नहीं आएगी और तो और कबीर दास तो पैदा हुए हैं उनके माता पिता है....


लेकिन हम मुस्लमान जिसे अपना रब अल्लाह मानते है वो पैदा नहीं हुआ है न वो किसी का बेटा है और न उसका कोई बेटा है और उसके जैसा कोई है ही नहीं पढ़िए सूरह 112 आयत नंबर 1-4 तक और तो और कबीर दास की तो फोटो है लेकिन हम जिसे अपना अल्लाह मानते है.....


उसकी कोई फोटो नहीं है अल्लाह खुद फरमाता है क़ुरान में की अल्लाह के जैसा कोई है ही नहीं और वो खूब सुनने वाला और देखने वाला है ......


और सुनिए कबीर दास तो इस धरती पर थे लेकिन हम मुस्लमान जिसे अपना "अल्लाह" मानते है वो तो अर्श ( आसमान ) में मुस्तवी है आपने सूरह फुरकान की आयत नंबर 52-59 की एडिटिंग की है.....


तो आप आयत नंबर  59 पढ़िए और तो और कबीर दास ने किसी चीज को पैदा नहीं किया है , हम मुस्लमान जिसको अपना "अल्लाह" रब मानते है वो तो हर  चीज़ को पैदा किया है.....आसमान और ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया है पढ़िए सूरह फुरकान की आयत नंबर 59


लिहाजा ये साबित हुआ कि रामपाल और उसके मानने वाले भंडवें जो दावा कर रहे हैं....."कि क़ुरान की सुराह फुरकान की आयत नंबर 52-59 में जो लफ्ज़ (कबीर ) आया है वो कबीर दास के लिए है.....उनका ये दावा झूठा है , वो लोग आप के आस-पास के ग्रुप या फ्रेंडलिस्ट में घुस कर भोले भाले मुसलमानों को फ्रि में किताबें देकर गुमराह कर रहें हैं.....ये लोग  कोरोना से भी ज्यादा ख़तरनाक हैं, कोरोना तो जांन छिन लेती है, ये  "इमान" छिन लेतें हैं, ऐसे लोग जहाँ भी आपको मिलें  पकड़ के लतिया दिजिए......

और मेरे आला हजरत फरमातें हैं.....


उन्हे जाना, उन्हें माना, ना रखा गैर से काम....

लिल्लाह'हिलहम्द मैं दुनियाँ से मुसलमान गया....


इस एडिटिंग पिक्चर में एक बात और लिखी है कि अंतिम पैग़म्बर संत रामपाल ......(माज'अल्लाह)


ये बातें सरासर झूठ है गलत है फेक है, आखिरी पैग़म्बर सिर्फ और सिर्फ मेरे प्यारे आका ﷺ मुहम्मद हैं...और मेरे प्यारे आका ﷺ  ने फ़रमाया क़यामत ( महापरलय ) उस वक़्त तक कायेम न होगी जब तक 30 झूठे दज्जाल ( यानी 30 झूठे पैदा होंगे जो अपने आपको को नबी , पैग़म्बर होने का दावा करेगे , लेकिन हक़िक़त में वो झूठे होगें )   न पैदा हो जाए .....


बुखारी हदीस नंबर 3609


रामपाल के मानने वालोंं  अन्धभक्तों आप किस कि बात को बढ़ा रहे हो जो आलरेडी एक हत्या की केस में जेल में बंद है.....

#सद्दाम_रज़ा_सिद्दीकी

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